बसंत पंचमी महापर्व


वैसे तो दैवीय शक्तियों का न तो आदि है, न ही अंत; लेकिन फिर भी भारत देश में विद्या और संगीत की देवी “माता सरस्वती” का जन्म दिन बसंत पंचमी के दिन मनाते हैं।  सरल शब्दों में कहा जाए तो यह दिन, जीवन में विद्या और संगीत के महत्व को समझने का और उनके प्रति संवेदनशील होने का है।

जिस तरह विद्या आपके व्यवहार को निर्मल बनाती है, उसी प्रकार संगीत आपके मन को शुद्ध करता है।  जहाँ विद्या जीवन की सबसे बड़ी शक्ति होती है, वहीं संगीत इस शक्ति को और सशक्त बनाता है।

वर्तमान शिक्षा प्रणाली मानो, केवल सूचना देने का माध्यम बन कर रह गई है।  इक्कीसवीं सदी में शिक्षा से ज्ञान मिले, यह मुश्किल है। मेरी नज़रों में वर्तमान शिक्षा पद्धति को संगीत से जोड़ने की आवश्यकता है। क्योंकि संगीत वह शक्ति है, जिसके तार मनुष्य की आत्मा से जुड़े होते हैं।  संगीत आपके मन, विचार और सम्पूर्ण चरित्र की शुद्धि करता है।

अगर ख़ुद  के अनुभव की बात कहूँ, तो मैने  अपना पूरा जीवन संगीत को समर्पित किया और संगीत ने इसके बदले मुझे अत्यंत हर्ष पूर्ण जीवन दिया। संगीत रुपी कर्म से मैंने सदा माँ सरस्वती की आराधना की, और मेरा व्यक्तित्व और जीवन दोनों को बदल दिया।

अक्सर लोग जीवन के अंतिम क्षणों में जाकर परमात्मा की शक्ति को महसूस करते हैं, परंतु मेरे जीवन में संगीत ने मुझे यह मौका हर रोज़ दिया है। संगीत के सात सुरों में मुझे पूरे ब्रह्माण्ड के सुखों का आनंद मिलता है, और मैं मरते दम तक माँ सरस्वती से इस आनंद को बरकरार रखने की प्रार्थना करता हूँ।

बसंत पंचमी महापर्व की आप सभी को हार्दिक बधाई।   

 

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