राम ते अधिक राम के दासा.


दुनिया चले ना श्रीराम के बिना… रामजी चलें ना हनुमान के बिना

सहज सरल श्रीरामजी भक्तों के कष्टों को न केवल जानते हैं अपितु उनको महसूस करते हैं, और तत्क्षण उन्हें दूर करते हैं। सृष्टिकर्ता श्रीरामजी सम्पूर्ण विश्व के कल्याणकर्ता हैं। हमारा शुभ रामजी के बिना हो नहीं सकता, अतः सच ही है कि हमारा काम रामजी के बिना नहीं चलता। पर सच यह भी लगता है कि रामजी के कदम हनुमानजी के बिना आगे नहीं बढ़ते।

श्रीरामजी के प्रति हनुमानजी की निस्वार्थ सेवा देखें तो यह तथ्य समझ आ जायेगा। रामजी के जीवन में हनुमानजी का आगमन ही तब हुआ जब रामजी पर कष्टों का साया छाया, और रामजी के प्रताप से उन्होंने प्रतिकूल परिस्थतियों पर विजय पाई। कैसी थी ये परिस्थितियां, एक नज़र डालें।

रावण द्वारा सीताहरण के बाद सीताजी का पता हनुमानजी ने ही लगाया। अशोकवाटिका में अनेक राक्षसों का वध कर रावण के सामने निशंक, निडर भाव से खड़े हुए। राम जी का प्रभाव प्रकट कर रावण को भयभीत किया। पश्चात् लंकादहन कर सीताजी से निशानी लेकर रामजी के पास पहुंचे। रामदूत के रूप में अपना पूरा कर्तव्य निभाया।

ज्यादा महत्वपूर्ण तथ्य देखें, विभीषण को राम सेवा हेतु रामजी के चरणों में आने को प्रेरित कर उन्हें (विभीषण को) कष्टों से मुक्ति पाने की राह दिखाई। उसी विभीषण ने रावण के नाभिकुंड का राज रामजी को बताया और रामजी ने रावण वध किया। युद्ध में लक्ष्मणजी के आहत होने पर केवल हनुमानजी ही समर्थ थे जो संजीवनी सहित द्रोणाचल पर्वत उठा लाये और लक्ष्मणजी स्वस्थ हुए।

रावण की मृत्यु के बाद रामजी के विजय की प्रथम सूचना देने भी हनुमानजी को ही भेजा गया था, और यहाँ तक कि बाद में सीताजी को ससम्मान लिवाने भी विभीषण को लेकर हनुमानजी ही रामजी की आज्ञा से गए थे। वनवास बाद रामजी के अयोध्या पहुँचने पर उनके राज्याभिषेक पश्चात् सुग्रीव अंगद निषादराज आदि सभी को रामजी ने ससम्मान विदा कर दिया। सिर्फ हनुमानजी को ही रामजी ने अपनी सेवा में रखा। अब यदि कहा जाए कि रामजी चलें न हनुमान के बिना तो सच ही है। इसीलिए यह भी सही कहा गया है “राम से अधिक राम के दासा.” रामजी ने खुद से अधिक हनुमानजी की महिमा प्रतिपादित की। यही कारण है कि आज रामजी से अधिक हनुमानजी के मंदिर हैं।

जय श्री राम! जय श्री हनुमान!

हनुमान जयंती की सबको शुभकामनाएँ, रामजी और हनुमानजी सभी को सुख शांति सुरक्षा प्रदान करें।

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1 Comment

  • Nihal Singh
    April 21, 2017 at 6:40 pm

    Sahi kaha apne , bilkul aisa laga koi sant bol raha sakshat , aisa laga hi nahi jaise mai apka post padh raha hu .
    Apki aawaz se parichit hu , isliye mai ye kalpna kar pa raha hu ki aap kaise bolte in vakyo ko .

    Mere mata aur pita k baad mere jeevan me sirf apka prabhav hai .

    Ishwar se mai ye pratidin prarthna karta hu aap swasth rahe aur mujhe ye avasar ek baar jarur prapt ho ki mai apse kuch sangeet Sikh saku .

    Dhanyavaad….

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