श्रद्धांजलि : किशोरी अमोनकर


भारतीय शास्त्रीय संगीत गायिका किशोरी आमोनकर का मुम्बई में सोमवार (3 अप्रैल2017) देर रात निधन हुआ। संगीत के क्षेत्र में हुनर और मेहनत से सिक्का जमानेवाली किशोरी आमोणकर को उनके चाहने वाले ताई के नाम से भी जानते थे।

किशोरी ताई जयपुर घराने की शिष्या थीं, जिन्होंने हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत में मेहनत से अपना परचम लहराया। दो वर्ष पहले ही किशोरी जी को जलोटा फ़ाउण्डेशन ने पद्मश्री पुरूषोतम दास जलोटा सम्मान से अलंकृत किया था। किशोरी ताई के राग आलाप सुन सुनकर कितनों ने ही अपने सुर पक्के किए, उनके लिए किशोरी अमोनकर का दुनिया को अलविदा कहना किसी सदमे से कम नहीं है। संगीत जगत की सबसे बुरी खबर यही है कि किशोरी अमोनकर अब हमारे बीच नहीं रहीं। अपने जीवन के 84 साल शास्त्रीय संगीत को समर्पित करने के बाद वो दुनिया छोड़कर चली गईं।

किशोरी अमोनकर के राग आज हर शास्त्रीय संगीत प्रेमी की प्लेलिस्ट में मिलेगें, लेकिन अफसोस कि अब वो सीमित ही रहेंगे हैं। रूह को सुकून देने वाली वो आवाज अब हमेशा के लिए खामोश हो गई। भारतीय शास्त्रीय संगीत का सबसे चमकता सितारा डूब गया। उनका जाना न सिर्फ जयपुर घराने बल्कि पूरे संगीत जगत की सबसे बड़ी क्षति है, जिसे अब शायद ही कोई पूरा कर सके।

किशोरी अमोनकर ने कहा था कि, अब वो इस संसार (संगीत) में वापस नहीं आना चाहतीं। वो मोक्ष चाहती हैं। संगीत में जिस तरह की तपस्या की जरूरत होती है उससे वो दोबारा नहीं गुजरना चाहतीं।

महिला शास्त्रीय गायकों की आधुनिक तानसेन को हमने खो दिया। इस हानि की पूर्ति नहीं की जा सकेगी।
किशोरी अमोनकर जी को कभी भुलाया नहीं जा सकेगा ।
ईश्वर उन्हें मोक्ष दे !

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