संगीतमय प्रेमाभिव्यक्ति का मधुर अवसर


अकथ कहानी प्रेम की ,कछु कही न जाए।
गूंगे केरी शर्करा, बैठे औ मुस्काए।।

(प्रेम की महिमा अकथनीय है, यह शब्दों में अभिव्यक्त नहीं हो सकती।
ठीक वैसे ही जैसे एक गूंगा व्यक्ति मीठा खाकर उसके आनंद का अपने शब्दों में वर्णन नहीं कर सकता।)

प्रेम चाहे ईश्वर के प्रति हो, प्राणी मात्र के प्रति हो, या मनुष्य का मनुष्य के प्रति, यह पवित्र, आनंदकारी अकथनीय अनुभूति है।
इसकी सम्पूर्ण अभिव्यक्ति शब्दों में हो नहीं सकती।

प्रेमाभिव्यक्ति के सन्दर्भ में अगर मैं बात करूं तो दो लोगों के आपसी पवित्र, समर्पित, अकथनीय प्रेम की अनुपम निशानी है, आगरा का ताजमहल…

इससे आकर्षित होकर, यहाँ देश-विदेश से अनेक लोग आते हैं। यहाँ बैठकर सुकून की अनुभूति करते हैं।
ऐसे अनूठे रोमांचकारी स्थल के आगोश में ताज महोत्सव के अंतर्गत यामीज़ कंसर्ट का आयोजन होना सोने पे सुहागा रहा।

ताज महोत्सव में अवर्णनीय प्रेम के भाव को संगीत के माध्यम से अभिव्यक्त करने का सुंदर प्रयास प्रशंसनीय है। प्रेम की निशानी ताजमहल के पार्श्व में स्थित महताब बाग के 11 सीढ़ी पर बैठकर प्रेमाभिव्यक्ति का अवसर मुझे भी मिला।
इसके लिए मैं खुद को सौभाग्यशाली मानता हूँ और ईश्वर एवं आयोजकों का धन्यवाद करता हूँ।

ताज के पार्श्व में प्रेम संबंधी मेरे ये उद्गार यहाँ प्रकट होते हैं:

तुम मुझसे मिलने शमा जलाकर, ताज महल में आ जाना।

1 Comment

  • Anju pandey
    March 26, 2017 at 3:40 pm

    Thanks a lot guru ji

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