ख़ुशी और गम दोनों से भरा, साल का सबसे मुश्किल दिन


जिंदगी क्या है?  बस एक सफ़र
आए, कुछ देर ठहरे और रवाना हो गए
लेकिन बिना सच्चे हमसफ़र के,
ये सफ़र मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है।।

मेरी प्यारी मेधा…
तुम्हें जन्मदिन की बहुत-बहुत शुभकामना।



कहते हैं, जिंदगी में ख़ुशी और गम, दोनों समान रूप से चलते रहते हैं, लेकिन जिसके साथ हम सबसे ज्यादा खुश रहते हों, अगर वही साथ छोड़, बहुत दूर चला जाए, तो फिर जीवन में बचता ही क्या है।

25-नवम्बर-2014, वो दिन, जब तीन साल पहले मैंने यही महसूस किया। उस दिन के बाद जब-जब ख़ुशी का कोई मौका आता, मुझे तुम्हारी कमी खलती। तुमने न सिर्फ हर कदम पर मेरा साथ दिया, तुम मेरी ताक़त बनीं, तुमने अच्छे-बुरे हर समय में मुझे बढ़ते रहने की प्रेरणा दी, और मुझे, मुझ से ज्यादा समझा। “अब मुझे इतना समझने वाला कोई नहीं, मेरे कदम से कदम मिलाकर चलने वाला कोई नहीं।” ये सोचकर मैं बिखर रहा था।


पर तुम मुझे बिखरता हुआ कहाँ देख सकतीं थीं, तुमने जिंदगी भर साथ निभाने का वादा किया था और तुम वादे की पक्की हो। मुझे गम में डूबता देख, तुमने मुझे आवाज़ दी। मैं चौंका और चारों ओर देखा, आँखें बंद की, ध्यान दिया, तुम्हारी आवाज़ संगीत के स्वर में आ रही थी। याद है, कैसे मेरे चेहरे पर मुस्कान खिल उठी थी। मैंने वीणा उठाई और रियाज़ शुरू किया, जितना मैं रियाज़ करता, उतना तुम्हें पास पाता। मैं समझ गया था,तुम मेरे जीवन के उस भाग में बस चुकीं थी, जो मेरे जीवन का सार था। और अब हमें कोई अलग नहीं कर सकता।  गाते समय मै जब-जब आँख बंद करता हूँ, तो ऐसा लगता है, तुम मेरे सामने बैठी मुझे गाते हुए देख रही हो।

 

कल तुम्हारा जन्मदिन था…
अब ये दिन, साल का सबसे मुश्किल दिन रहता है…  जहाँ साल के हर दिन, हर पल मैं तुम्हें अपने पास, अपने साथ महसूस करता हूँ। वहीं इस दिन, मन कुछ भी सुनने-समझने से इंकार कर देता है, वो तुम्हें देखना चाहता है, चाहता है, बस ये दिन, बस ये एक दिन, तुम मैं और आर्यमन साथ बिताएँ। और तुम्हारे साथ मनाया, हर जन्मदिन एक एक कर मेरी आँखों के सामने से गुज़र जाता है, कुछ मुस्कान, कुछ अश्क अनायास ही निकल जाते हैं। ख़ुशी और गम ऐसे इकट्ठे होते हैं, कि दोनों को जुदा करना नामुमकिन हो जाता है।

इस दिन, एक पल ऐसा लगता है जैसे दुनिया ही उजड़ गई है, कुछ नहीं बचा। दूसरे पल, तुम्हारा हँसता हुआ चेहरा दिखता है, और सारे गम गायब हो जाते हैं।

मेधा, तुम सदा मेरे साथ यूँही रहना…
तुम मेरी शक्ति, मेरी प्रेरणा, मेरा अक्स हो। तुम मेरी शख्सियत का ऐसा हिस्सा हो, जिसके बिना मैं अधूरा हूँ। 25-जून, को हर बार मुझे तुम्हारी बहुत ज्यादा कमी महसूस होती है। तुम्हे ये पत्र भी मैंने कल ही लिखने की कोशिश की, पर गमो-ख़ुशी के तूफ़ान में शब्दों में भावनाओं को बुन न सका। आज ये पत्र लिख पाया हूँ, वो भी इसलिए की तुम साथ हो।

 

पर तुम जानती हो, ये शब्द मेरे दिल की भावनाओं की अभिव्यक्ति कर ही नहीं सकते, क्यूंकि हमारे रिश्ते को शब्दों में समेटना असंभव है। जन्मदिन की अनंत शुभकामनाएँ । मैं तुमसे यूँही प्यार करता रहूँगा, आज, कल और हमेशा।

❤️ I love you Medha ❤️

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2 Comments

  • Shardul
    June 26, 2017 at 8:12 pm

    परमादरणीय श्रीमान जलेटा साहब वैसे तो किसी की निजी भावनाओ को जानने का किसी को अधिकार नही किन्तु क्षमा याचना सहित मैने ये पत्र आज २७ जून को रात १:३५ पर पढ़ा, आप विश्वास कीजिए आपका अपने हमसफर के निश्छल प्रेम देखकर आंखे सजल होगई। सचमुच आपका प्रेम मिसाल है।।

  • Jogendra s tuli
    June 27, 2017 at 7:52 am

    Anup jalota ji..
    Me Aap ka bhakta hu..
    Sirf aap ke sangit ka nahi but aap ke vyaktitva ka bhi
    Aap ke jivan se judi laghbhg had ghtana ko mene Jana he,mehsus kiya he..
    Medhaji Aap ke liye kya thi??
    Ye me janta hu..,
    Aap ki bhavnaye jankar netro me aansu bhar aaye.
    Aap dono ki Jodi hazaro janmo tak bani rahe.
    Medhaji hamesa aap ke sath hi he..
    Love you, both of you..

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