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संगीतमय प्रेमाभिव्यक्ति का मधुर अवसर


अकथ कहानी प्रेम की ,कछु कही न जाए। गूंगे केरी शर्करा, बैठे औ मुस्काए।। (प्रेम की महिमा अकथनीय है, यह शब्दों में अभिव्यक्त नहीं हो सकती। ठीक वैसे ही जैसे एक गूंगा व्यक्ति मीठा खाकर उसके आनंद का अपने शब्दों में वर्णन नहीं कर सकता।) प्रेम चाहे ईश्वर के प्रति हो, प्राणी मात्र के प्रति